ECG से क्या पता चलता है
ECG आपके दिल की विद्युत गतिविधि को रिकॉर्ड करता है। इससे अनियमित धड़कन (अतालता, अलिंद कंपन), पिछले या मौजूदा हार्ट अटैक के संकेत, हाई ब्लड प्रेशर से हृदय की मांसपेशी का मोटा होना, और हृदय के कार्य को प्रभावित करने वाले इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का पता चलता है।
ECG सीधे तौर पर बंद धमनियों का पता नहीं लगाता। इसके लिए अस्पताल में और जांच करानी पड़ती है। लेकिन छाती में दर्द, धड़कन तेज होने या सांस फूलने की समस्या जांचने के लिए यह पहला कदम है।
आपको ECG कब करवानी चाहिए
- छाती में दर्द या दबाव
- दिल की धड़कन तेज होना या घबराहट
- बिना किसी शारीरिक गतिविधि के सांस फूलना
- चक्कर आना या बेहोशी
- दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज़ का इतिहास
- 50 वर्ष से अधिक उम्र होने पर नियमित जांच
घर पर यह कैसे होता है
- विजिट बुक करें और बताएं कि आपको ECG जांच चाहिए।
- बिस्तर पर लेट जाएं। छाती और टखनों के आसपास के कपड़े हटा दें।
- 10 इलेक्ट्रोड स्टिकर आपकी छाती, बांहों और पैरों पर लगाए जाते हैं। मशीन 30 सेकंड तक रिकॉर्ड करती है। आपको कुछ भी महसूस नहीं होता।
- नतीजे: डॉक्टर तुरंत प्रिंटआउट पढ़कर नतीजे समझाते हैं। आपको एक कॉपी दी जाती है।
अगर नतीजे असामान्य हों तो क्या होता है
डॉक्टर नतीजों को समझाते हैं और अगले कदम की सलाह देते हैं। इसमें कार्डियोलॉजिस्ट के पास रेफर करना, अतिरिक्त जांच, दवा में बदलाव, या ज़रूरी होने पर अस्पताल भेजना शामिल हो सकता है।
